Bihar Board Class 12th Hindi Chapter 7

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 

जिस तरह से एक बच्चा खिलौने के लिए बेचैन रहता है उसी प्रकार माँ भी अपने संतान के प्रेम में बच्ची होती है और अपने संतान रूपी खिलौने को बस एक बार नजर भर के देखने को बेचैन रहती है।


Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य :----



पुत्र वियोग सुभद्रा कुमारी चौहान | Putra Viyog


             ( 1 )

आज दिशाएँ भी हंसती हैं 

है उल्लास विश्व पर छाया , 

मेरा खोया हुआ खिलौना 

अब तक मेरे पासन आया । 


शीत न लग जाए , इस भय से 

नहीं गोद से जिसे उतारा 

छोड़ काम दौड़ कर आई 

' मा ' कहकर जिस समय पुकारा ।


 

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश प्रसिद्ध कवयित्री ' सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित उनके प्रतिनिधि काव्य संकलन मुकत में संकलित कविता ' पुत्र वियोग ' से अवतरित है । कवयित्री की यह रचना एक शोकगीत है । इस कविता में पुत्र के असामयिक निधन के बाद पीछे तापते रह गए माँ के हृदय के शोक की मार्मिक एवं हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति की गई है । इन पक्तियों में कवयित्री ने पुत्र वियोग में उत्पन्न नैराश्य की भावना का चित्रण किया है । 


व्याख्या : पुत्र की असामयिक मृत्यु के शोक से उद्विग्न मो अपने भावों को प्रकट करते हुए कहती है कि आज सपूर्ण विश्व में उल्लास का वातावरण है तथा सारे संसार में खुशियों छाई है , पर मेरे लिए ये सारी खुशियों बेकार है । मेरा प्रिय पुत्र मुझसे छिन गया है । 

मैं उसके इंतजार में दुखी पैठी है । पर मेरा खोया हुआ पुत्र वापस मेरे पास अभी तक नहीं आया है । फिर वह अपने पुत्र को याद करती हुई कहती है कि मैंने अपने पुत्र को हर दुख से बचाने का प्रयास किया । उसे सर्दी न लगे , वह बीमार न पड़े , यह सोचकर मैंने उसे गोद से जमीन पर भी नहीं उतरने दिया । 

जब भी उसने माँ काकर मुझे आवाज लगाई , में अपना सारा काम - काण छोड़कर उसके पास दौड़कर चली आई । उसके आगे मैनें स्वयं के सुख - दुख की लेशमात्र भी चिन्ता नहीं की । 


Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 


          ( 2 )


थपकी दे दे जिसे सुलाया 

जिसके लिए लोरियाँ गाई , 

जिसके मुख पर जरा मलिनता 

देख आँख में रात बिताई । 


जिसके लिए भूल अपनापन 

पत्थर को भी देव बनाया 

कहीं नारियल , दूध , बताशे 

कहीं चढ़ाकर शीश नवाया । 


प्रसंग : पूर्ववत कायिनी अपने पुत्र में अत्यधिक प्यार करती थी नया उसे जरा सी तकलीपा में देखकर वह परेशानी थी । उसकी परेशानी दूर करने के लिए यह हर सपा उपाय करती थी । कविधी अपने पुत्र के साथ किए गए प्यार भरे व्यवहारको गार कर रही है तथा उसे एक - एक कर ये सारी बातें याद आने लगती हैं । 


व्याख्या :- कवित्री कहती है कि मैने अपने पुत्र के हर दुख - सुखवा ध्यान रखा । मैने उसे प्यार से किया देकर सुलाने का प्रयास किया । उसे मीठी - मीठी बोरिया सुनाई , ताकि वह आराम से भी जाए । 

अपने पुत्र के चेहरे पर जरा - सी मलिनता या उसकी उदासी देख कर में रात - रात भर सो नहीं पाती थी । अपने पुत्र को भालाई और सुख के लिए में अपना सर्वस्व भूल चुकी थी । उसके सुख की कामना सेकर मने पल्या को देवता मानकर उसकी विधिवत पूजा - अर्चना की । कही नारियत . दूध और बताशे बढ़ाए तो कहीं मंदिरों में शीश झुकाकर अपने पुत्र की भलाई की कामना की ।

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 


             ( 3 ) 

             

 फिर भी कोई कुछ न कर सका 

 डिन ही गया खिलौना मेरा 

 में असहाय विवश बेटीही 

 रही उठ गया होना मेरा । 

 

तड़प रहे हैं विकल प्राण ये 

मुझको पल भर शांति नहीं है 

वह खोया धन पा न सकूंगी 

इसमें कुछ भी प्रांति नहीं है । 



प्रसंगः पूर्ववत । यहाँ बताया गया है कि कवयित्री ने अपने पुत्र की सलामती के लिए हर प्रकार के प्रयास किए , पर मृत्यु के आगे कोई कुछ नहीं कर सका है । यह भी उसके आगे जसहाय हो गई तथा उसका पुत्र चला गया । 


व्याख्या : कवयित्री करती है कि उसके द्वारा की गई पूजा - अर्चना भी उसके पुत्र को नहीं बचा सकी । उसका पुत्र असमय मृत्यु को प्राप्त हो गया और कोई कुछ भी नहीं कर सका । 

उसका सबसे प्यारा खिलौना उससे छिन गया तथा वह असहाय और विवश होकर बैठी देखती रही । उसका प्यारा पुत्र उसकी आँखों के सामने ही भगवान को प्यारा पुत्र वियोग की आग में जलती माँ कहती है कि उसका हृदय इस असहय कष्ट को सह नहीं पा रहा है ।

                     उसके हदय को पल भर के लिए शाति नहीं मिल पाई है । उसे यह बात भली भांति ज्ञात है कि उसका जो अनमोल धन ( पुत्र ) खो गया है , उसे वह वापस नहीं पा सकती है । वह अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए उत्ससे छिन गई है . इस बात में जरा भी संदिह नहीं है । 

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Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 

           ( 4 )


फिर भी रोता ही रहता है 

नहीं मानता है मन मेरा 

बड़ा जटिल नीरस लगता है 

सूना सूना जीवन मेरा । 


यह लगता है एक बार यदि 

पल भर को उसको पा जाती 

जी से लगा प्यार से सर 

सहला सहला उसको समझाती ।



प्रसंग : पूर्ववत । कवयित्री को यह अच्छी तरह ज्ञात है कि मृत्यु पर किसी का वश नहीं है । जो एक बार काल के मुह में चला गया , वह कभी लौटकर नहीं आता है । किंतु एक माँ के लिए अपने बेटे को भूल पाना असभा है । उसका हदय तो पत्र वियोग में हमेशा तड़पता रहता है । 

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व्याख्या : पुत्र शोक से मर्माहत कवयित्री अपनी पीड़ा को व्यक्त करते हुए करती है कि यह जानते हुए भी कि जो मर गया उसे वापस नहीं पाया सकता है फिर भी उसका हदय अपने पुत्र को याद कर - कर के रोता रहता है । उसका मन किसी तरह से समझाने पर भी नहीं मानता है । पुत्र की मृत्यु के उपरांत उसका जीवन कठिन और सूना सूना हो गया है । जीवन के सभी रस उससे दूर हो गए हैं । 

                        कवयित्री अपने मन में सोचती है कि अगर वह अपने खोए हुए पुत्र को एक बार फिर से पा जाती , तो उसे अपने हृदय से लगा लेती और जी - भरकर प्यार करती वह उसका सिर बार - बार सहताती तथा उसे समाती कि वह अपनी भी को छोड़कर दूर न जाए ।


Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य :--

1. कड़बक

2. पद सूरदास

3. पद तुलसीदास

4.छप्पय 

5.कविप्त 

6. तुमुल कोलाहल कलह में 

7. पुत्र वियोग 

8.उषा

10.अधिनायक 

11.प्यारे नन्हें बेटे

12. हार जित

13. गांव का घर 


Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य Chapter 7 

                        

        ( 5 )

        

मेरे भैया मेरे बेटे अब 

मां को यो छोड़ न जाना 

बड़ा कठिन है बेटा खोकर 

माँ को अपना मन समनाना । 


भाई - बहिन भूल सकते हैं 

पिता भले ही तुम्हें भुलावे 

कितु रात - दिन की साचिन माँ 

कैसे अपना मन समझाये ! 



प्रसंग : पूर्ववत कवयित्री का जीवन पुत्र की मृत्यु के बाद सूना - सूना हो गया है । वह अपने पुत्र को पुनः पाना चाहती है तथा उसे समझाना चाहती है कि वह अपनी माँ को छोड़कर कहीं न जाए । क्योंकि एक मों के लिए पुत्र को खोकर अपना मन समझाना बहुत कठिन कार्य है ।


व्याख्या : पुत्र वियोग में तड़पती शोकाकुल कवयित्री सोचती है कि अगर उसका पुत्र उसे पुनः मिल जाए तो वह उसे अपने पास बैठाकर समझाएगी कि मेरे प्रिय पुत्र मेरे भैया ( बेटा ) अब तुम अपनी माँ को छोड़कर कभी मत जाना । 

एक माँ के लिए सबसे बड़ा दुख उसके बेटे का यूँ बिछुड़कर दूर चले जाना ही है । पुत्र वियोग से दुखी मन को सांत्वना देना एक माँ के लिए बड़ा ही कठिन होता है । 

                       माँ अपने हृदय की संवेदना प्रकट करते हुए कहती है कि हे पुत्र ! तुम्हारे भाई - बहन तथा पिता भले ही कुछ समय बाद तुम्हे भूल जाएँ , पर मों तो अपने पुत्र की दिन - रात की साथिन होती है । वह उसे अपने गर्भ में पालती - पोसती है तथा उसे अपने साथ लिए हुए घूमती है । इसलिए वह अपने मन को कैसे और क्या समझा सकती है । उसके लिए | संतोष करना संभव नहीं है । 



Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य :--

1. कड़बक

2. पद सूरदास

3. पद तुलसीदास

4.छप्पय 

5.कविप्त 

6. तुमुल कोलाहल कलह में 

7. पुत्र वियोग 

8.उषा

10.अधिनायक 

11.प्यारे नन्हें बेटे

12. हार जित

13. गांव का घर 








 

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