Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 3

Bihar Board Class 12th Hindi Book Solutions गद्य Chapter 3 ...

संपूर्ण क्रांति गद्य Chapter 3 ...



अभ्यास :-

प्रश्न 1. आंदोलन के नेतृत्व के संबंध में जयप्रकाश नारायण के क्या विचार थे , आंदोलन का नेतृत्व वे किस शर्त पर स्वीकार करते हैं ? 

उत्तर - आंदोलन के नेतृत्व के संबंध में जयप्रकाश नारायण कहते हैं कि मुझे नाम के लिए नेता नहीं बनना है । में सबकी सलाह लूंगा , सबकी बात सुनूंगा । सबसे बातचीत करूँगा , बहस करूंगा , समझूगा तथा अधिक से अधिक बात करूंगा। आपकीबात स्वीकार, लेकिन फैसला मेरा होगा । आपको इस फैसले को मानना होगा । इसी तरह के नेतृत्वही महत रापत हो सकती है । अगर ऐसा नहीं होता है , सो आपस की बहसों में पता नहीं किया गिर जाएंगे और इस प्रतिमा का नतीजा प्रभावित करती है । 


प्रल 2. जयप्रकाश नारायण के पास जीवन और अमेरिका प्रवास का परिचय है । इस अवधि की कैन - सी बाते आपको प्रभावित करती है?

 उत्तर - जयप्रकाश नारायण अपने मात्र जीवन से ही आयल दर्जे के विद्यार्थी थे । 1971 में पटना कॉलेज में आई.मरा , सी . के विद्यार्थी थे । अपने मात्र जीवन में गांधी जी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया । उन्होंने बिहार विद्यापीठ से आई.एस.सी. की परीक्षा दी । वे अमेरिका जाकर पाई करना चाहते थे । लेकिन उनके पिता के पास अधिक बन न था । फिर भी ये किसी प्रकार अमेरिका चले गए । लोगों ने इस बात के लिए उनकी पर निदा की । किला लोग किया । बी.ए. पास करने के बाद उन्हें स्कॉलरशिप मिलने लगी । यह नहीं जानते थे कि उन्हाने अमेरिका में पढ़ाई करने के लिए वहाँ के लोहे के कारखानों , बागानो होटलों , दुकानों आदि म काम इस दौरान जयप्रकाश नारायण द्वारा किया गया कठोर परिवम तथा सीमित साधनों से गुजारा करने की उनकी हिम्मत मुझे काफी प्रभावित करती है। यह नहीं उन्होंने आत्महित के साथ-साथ जनहित के सिद्धांतों का अनुकरण भी किया

 

प्रश्न 3. जयप्रकाश नारायण कम्युनिस्ट पार्टी में क्यों नहीं शामिल हुए । काफी प्रभावित करती है । यही नहीं उन्होंने आत्महित के साथ - साथ जनहित के सिद्धांतों का अनुकरण भी किया । 

उत्तर - जयप्रकाश ने लेनिन से सीखा था कि जो गुलाम देश है यहाँ के जो कम्युनिस्ट है उनको यहाँ की आजादी की लड़ाई से अपने को किसी भी कीमत पर अलग नहीं रखना चाहिए । हालांकि लड़ाई का नेतृत्व ' बुर्जुआ क्लास ' के हाथ में , पूजीपतियाँ के हाथ में होना चाहिए । कम्युनिस्टों को अपने आप को आइसोलेट नहीं करना चाहिए । इसी कारण जयप्रकाश अमेरिका से वापिस आकर कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल होने की बजाए देश की आजादी के लिए कांग्रेस में शामिल हुए । 

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प्रश्न 4. पाठ के आधार पर प्रसंग स्पष्ट करें 

( क ) अगर कोई डिभाक्रेसी का पुश्मन है , तो ये लोग दुग्मन हैं , जो जनता के शांतिमय कार्यक्रमों में धापा टालते हैं , उनकी गिरफ्तारियों करते हैं , उन पर लाठी चलाते हैं , गोलियां चलाते हैं । 

( ख ) व्यक्ति से नहीं हमें तो नीतियों से झगड़ा है , सिद्धांतों से अगड़ा है , कार्यों से प्रगड़ा है । 

उत्तर- ( क ) एक बार पुलिस के एक उच्चाधिकारी जयप्रकाश नारायण जी से मिलने आए तथा उनसे कहने लगे कि मैंने दीक्षित जी से सुना है कि अगर जयप्रकाश जी नहीं होते तो विचार वल गया होता । यह सुनकर जयप्रकाश जी ने प्रश्न किया कि अगर ऐसा है तो फिर लोगों को मेरे नेतृत्व में होने वाले प्रदर्शनों तथा सभा में आने से क्यों रोका जाता ? 

आप लोग जनता के प्रतिनिधि होकर उन्हीं के देश में उन पर प्रतिबंध लगाते हो । ऐसा करते हुए तुम्हें शर्म भी नहीं आती । उनके विचार में अगर देश में प्रजातंत्र का कोई दुश्मन है तो ये लोग हैं जो जनता द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण कार्यक्रमों में बाधा डालते हैं । लोगों पर लाठियां बरसवाते हैं तया उन पर गोलियों चलवाते हैं और उन्हें गिरफ्तार करवाते हैं । 


( ख ) जयप्रकाश नारायण जी के कुछ मित्र जिनमें से कुछ सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य भी ये यह चाहते थे कि उनके नया इंदिरा जी के मध्य मेल - मिलाप हो जाए । इस पर उन्होने बहुत ही साफ व स्पष्ट शब्दों में कहा था कि मेरा झगड़ा किसी व्यक्ति के साथ नहीं है । मेरा झगड़ा तो सरकार द्वारा लागू गलत नीतियों , व्यर्य के सिद्धांतों तया फालत के कार्यों से है । 



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प्रश्न 5 , बापू और नेहरू की किस विशेषता का उल्लेख जेपी ने अपने भाषण में किया है । 

उत्तर - जयप्रकाश नारायण अपने भाषण में कहते हैं कि जब हम नौजवान ये तो कभी - कभी हम बापू के सामने कह दिया करते थे कि हम आपकी यह बात नहीं मानेंगे । किन्तु गांधी जी में इतनी महानता थी कि वे इसका बुरा नहीं मानते थे । इसके विपरीत ये हमें अपने पारा बुलाकर प्रेमपूर्वक समझाते थे । 

जयप्रकाश जी जागे कहते हैं कि नेहरू जी से भी मेरा बड़ा सेट या तथा वो भी मुधो बहुत प्यार करते थे । मैंने कई बार उनकी आलोचना की । लेकिन यह उनका बड़प्पन या कि अक्सर उन्होंने हमारी आलोचनाओं का पुरा नहीं माना । उनके साथ जो मतभेद था वह परराष्ट्र की नीतियों के विषय में था । 


प्रश्न 6. अष्टाचार की जड़ क्या है ? क्या आप जेपी से सहमत हैं , इसे दूर करने के लिए क्या सुमार देंगे ? 

उत्तर - वर्तमान में मारा देश आज़ाद है किन्तु इस गणतंत्र देश में जनता कराह रही है । हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है । सरकारी दफ्तरों , बैंकों आदि में रिश्वत के बिना जनता का काम नहीं होता । इस भ्रष्टाचार की जड़ चुनावों में होने वाला भारी खर्च है । 

                         चुनावों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं । यह सारा पैसा काले धन के रूप में आता है जिसका कोई हिसाब - किताब नहीं होता । हम भी जयप्रकाश जी के इस विचार से सहमत है । सरकार की गलत नीतियाँ भी भ्रष्टाचार बढ़ाने में योगदान देती है । देश में व्याप्त अष्टाचार की जड़ तभी दूर हो सकती है जब पूरी जनशक्ति देशहित तया जनकल्याण के लिए अपनी सेवा पूरी आस्था के साथ दे । यदि देश के कर्मचारी , मेता , पदाधिकारी आदि समर्पित भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करें तभी देश में फैले हुए भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सकता है ।


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प्रश्न 7.दलविहीन लोकतंत्र और समाजवाद में कैसा संबंध है

उत्तर - दलविहीन लोकतंत्र सर्वोदय विचार का मुख्य राजनीतिक तिवांत है । इसके अनुसार ग्राम सभाओ के आधार हो जाएगी । समाज लोकतामिक होगा , तथा उस समाज में लोकतंत्र का सम्मा स्वरूप प्रकट होगा । ऐसे समान साम्यवाद की तरफ बढ़ता जाएगा , जैसे - पैसे रामा - नरेट का आय होता जाएगा गया आत में एक स्टेटतेश सोसाइटी पर निश्चय ही नजिन होगा । 


प्रश्न 8: संघर्ष समितियों से जयप्रकाश नारायण की क्या अपेक्षाएं हैं । 

उत्तर - जयप्रकाश नारायण संपर्क समितियों से अपेक्षा करते हैं कि विधानसभा चुनावों में जय - संपर्य तथा जन सही समितिया मिल कर आम राय से अपना उम्मीदवार वहा को अयमामहे उम्मीदवारों से किसी सही उम्मीदवार को मालाको अगर इन समितियों के बीच आम राय नहीं बनती है तो कोई ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे आपस में जो भोर ।। समितिया अपना उम्मीदवार बहा कर सणे या किसी उम्मीदवार को अपनी मान्यता दे सके । चुनावों में जीतने वाले उम्मीदवार के मापी कार्यक्रमों पर काही नितरानी रखने का काम भी ये सावं समितियों करेंगी । अगर ये ईमानदारी से अपना कार्य नहीं करते तो उन्नों इस्तीफा देने को भाप्य कोगी । इस प्रकार से इन लोगों के ऊपर जनता का अनुमा सीमा तया ये उछाल , निरंकुश और स्वच्छद मसीह पाएंगे । 


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प्रश्न 9. जवकाना नारायण के इस भाषण से आप अपना सबसे प्रिय अंश घु और मताएं कि यह समये अधिक प्रभावी क्यों लगा।

 उत्तर - जय प्रकाश नारायण सरा दिए गए भाषण में जो अंश मुझे सबसे प्रिय समा , वह निम्नलिखित है -- निनो , अमेरिका मेवामानों में मैने काम किया , कारखानों में काम किया - लोहे के कारखानों में । जहाँ जानवर मारे जाते है , उन कारखानों में काम किया । जन गनिर्सिटी में पढ़ता था , मुट्टियों में काम करके इतना कमा लेता था कि कुछ पाना हम तीन बार विधायी मिर पकाते थे , 

 और रास्ते में हम लोग खा - पी लेते थे । एक कोठरी में कई आदमी मिलकार रहते थे , रुपमा बचा लेते थे , कुछ कपड़े खरीदने , कुछ फीस के लिए और बाकी हर दिन - रविवार को भी छुट्टी नहीं एक घंटा रेस्यों में , सेटल में या तो बर्तन धोया या बेटर का काम किया , तो शाम को रात का खाना मिल गया , दिन का खाना मिल गया किराया करी से मकान का हमको आया बराबर दो - तीन लड़के कितने वर्षों तकदो चारपाई नहीं थी कमरे में - एफ चारपाई पर में और कोई न कोई अमेरिकन लच्या रहता था । हम दोनों साथ सोते थे , एक रजाई हमारी होती थी ।

 इस गरीबी में में पढ़ा हूँ । इतवार के दिन या कुमार यम में , यह जो होटल का काम है - उसको छोड़ करके , जूते साफ करने का काम शुशाइन पार्लर ' में उससे ले करके कमोद साफ करने का काम होटलों में करता था । वहीं जब बी.ए. पास कर लिया , स्कॉलरशिप मिल गई : तीन महीने के बाद असिस्टेंट हो गया डिपार्टमेंट का . ' यूटोरियल क्लास ' लेने लगा , तो कुछ आराम से रहा इस सोच में । इन लोगों से पूछिए । मेरा इतिहास ये जानते हैं और जानकर भी मुझे गालियां देते हैं । 

 मुझे भाषण यह अंश सबसे अधिक प्रभावी लगने का कारण यह है कि इसमें एक विद्यार्थी के कठोर परिचम तथा शिक्षा प्राप्ति के लिए उसकी सच्ची लग्न का वर्णन मिलता है । जयप्रकाश नारायण जी ने विदेश में रहकर विभिन्न कतिनाइयों का सामना करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की , वह पटना एक विद्यार्थी के लिए बहुत प्रेरक प्रसंग है । 

 

 

प्रश्न 10. चुनाव सुधार के बारे में जयप्रकाश जी के प्रमुख सुझाव क्या हैं ?उन सुझावों से आप कितना सहमत है । 

उत्तर - जयप्रकाश जी ने चुनाव सुधार के बारे में निम्नलिखित सुदगद दिए हैं पुनाव पद्धति में आमूल परिवर्तन किया जाना चाहिए ।

 ( i ) चुनावों पर होने वाला खर्च कम होना चाहिए ।

 ( ii ) ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि गरीब उम्मीदवार भी चुनाव में भाग ले सकें । 

 ( iii ) मतदान प्रक्रिया स्वच्छ और स्वतंत्र होनी चाहिए । ( iv) उम्मीदवारों का चयन वास्तविक रूप से मतदाताओं के हाथ में होना चाहिए । 

 ( V ) मतदाता चुनाव के बाद भी अपने प्रतिनिधियों पर अंकुश रख पाएँ । 

 ( vii ) जन - संघर्ष समितियों आम राय से जनता के लिए सही उम्मीदवार का चयन करें । 

 ( vii ) अगर कोई जन प्रतिनिधि गलत कार्य करता है तो संघर्ष समितियों उसे इस्तीफा देने के लिए बाध्य करें । जेपी द्वारा दिए गए उपरोक्त सुझाव देशहित तथा जनकल्याण के लिए उपयोगी है । हम इन सुझावों से पूर्णतया सहमत हैं ।

 

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प्रश्न 11. दिनकर जी का निधन कहीं और किन स्थितियों में हुआ था ? 

उत्तर - दिनकर जी का निधन “ विलिंगटन नर्सिंग होम में हुआ था जो अपने जमाने के अस्पतालों में अत्यधिक सम्पन्न माना जाता था । दिनकर जी अपने मित्र रामनाथ गोयनका के पर अतिथि के रूप में ठहरे हुए थे । उसी रात्रि को उन्हें दित्त का दौरा पड़ा । गोयनका जी ने तीन मिनट के अन्दर उन्हें उस अस्पताल में पहुंचा दिया । डाक्टरों ने अपना पूरा प्रयास किया पर उनको बचा नहीं सके । 



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