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प्यारे नन्हें बेटे को – विनोद कुमार शुक्ल की कविता

 

प्यारे नन्हें बेटे को – विनोद कुमार शुक्ल की कविता


प्रस्तुत कविता विनोद कुमार शुक्ल की 'वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह'  संकलन से लिया गया है। जिसमें लोहे को कर्म का प्रतीक और कर्मठता एवं घर-गृहस्थी की शोभा के साथ सम्पूर्ण जीवन का आधार बताया गया है। साथ ही मेहनत कश और औरतों को भी लोहा ही कहा गया है।




प्यारे नन्हें बेटे को

       ( 1 ) 

 

प्यारे नन्हें बेटे को 

कंधे पर बैठा 

' मैं दादा से बड़ा हो गया ' 

सुनना यह । 


प्यारी बिटिया से पूछूंगा

 ' बतलाओ आसपास

 कहाँ - कहाँ लोहा है 

 ' चिमटा , करकुल , सिगड़ी 

 समसी , दरवाजे की साँकल , कब्जे 

 खीला दरवाजे में फंसा हुआ ' 

 वह बोलेगी झटपट।

 


 प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश यशस्वी कवि विनोद कुमार शुक्ल की रचना ' प्यारे नन्हें बेटे को ' से अवतरित है । यह कविता उनके कविता संग्रह ' वह आदमी नया गरम कोट पहनकर चला गया विचार की तरह ' में संकलित है । कविता का नायक भिलाई , छत्तीसगढ़ का रहने वाला है । जो लोहे की खदानों के लिए प्रसिद्ध है । वह अपने नन बेटे को कंधे पर बैठाए हुए है तथा घर में बैठी अपनी छोटी - सी बिटिया से कौतूहलपूर्ण यातें कर रहा है । 

 


व्याख्या ::- कविता का नायक कल्पना रहा है कि उसने अपने नन्हें बेटे को प्यार अपने कंधे पर बैठाया हुआ है । पिता के कंधे पर बैठा पुत्र कहता है कि अब तो वह दादा से भी बड़ा हो गया है , पिता को अपने बेटे के मुँह से यह सुनना अच्छा लगता है । अब वह अपनी विटिया से पूछता है कि बताओ हमारे आसपास लोहा कहाँ कहाँ है । इसके साथ ही साथ वह मन ही मन में उसका जवाब भी सोचता है कि वह बाल सुलभ अंदाज में कहेगी कि हमारे घर में चिमटा , करछुल , अंगीठी , सँड़ासी , दरवाजे की साँकल , दरवाजे में लगे कब्जे तथा मोटी मोटी कीलें आदि सभी चीजें लोहे से ही बनी हैं । इस प्रकार लोहा विभिन्न रूपों में हमारे आसपास हर जगह व्याप्त है।




      ( 2 ) 

 

रुककर वह फिर याद करेगी 

' एक तार लोहे का लंबा 

लड़की के दो खंबों पर 

तना बँधा हुआ बाहर 

सूख रही जिस पर 

भय्या की गीली चड्डी ! 

फिर - एक सैफ्टी पिन , साइकिल पूरी । आसपास वह प्यान करेगी 

सोचेगी 

दुबली पतली पर 

हरकत में तेजी कि 

कितनी जल्दी

जान जाए वह 

आसपास को - को लोहा है । 


 


प्रसंगः :- पूर्ववत् । पिता सोच रहा है कि जब वह अपनी बेटी से यह पूरेगा कि लोहा की यही है , तो उसी नन्हीं चिटिया लोहे से बने सामानों का नाम तत्काल उसे बता देगी । उसे लगता है कि लोहा अन्य सामानों काम भी उपस्थित है । पिता का विचार है कि वह इस संबंध में अन्य चीजों के बारे में भी सोचेगी । 


व्याख्या ::- पिता कल्पना करता है कि उसकी नन्हीं चिटिया अपने आस - पास उपस्थित लोहे की वस्तुएँ पाकर कुछ सोचने लगती है । व लोहे से बनी कुछ अन्य वस्तुओं को याद करने लगती है । अचानक उसे याद आता है कि उसके घर के बाहर कपड़े सुखाने के लिए लकड़ी के दो संभों पर बंधा हुआ तार भी लोहे का बना है , जिस पर उसके छोटे भाई के गीले कपड़े सूख रहे हैं । इसके अलावा छोटी सी सेफ्टी पिन तथा साइकिल भी तो लोहे की ही बनी होती है । इतने नाम बताने के बावजूद उसे तसल्ली नहीं होती है । यह लोहे से बनी कुछ और वस्तुओं के बारे में सोचने लगेगी । हालांकि वह भारीर से दुबली - पतली है परन्तु काफी चुस्त व सजग है । यह शोध की यह जान सेगी कि उसके आस - पास लोहा और कहाँ - कहाँ हो सकता है । 


Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य :--

1. कड़बक

2. पद सूरदास

3. पद तुलसीदास

4.छप्पय 

5.कविप्त 

6. तुमुल कोलाहल कलह में 

7. पुत्र वियोग 

8.उषा

10.अधिनायक 

11.प्यारे नन्हें बेटे

12. हार जित

13. गांव का घर

          ( 3 )


मैं याद दिलाऊँगा 

जैसे सिखताऊँगा बिटिया को 

" फावड़ा , कुदाली , गिया , बसुला , खुरपी 

पास खड़ी बेलगाड़ी के 

धक्के का पट्टा , 

बैलों के गले में काँसे की घंटी के अंदर 

लोहे की गोली । 

पत्नी याद दिलाएगी 

जैसे समझाएगी बिटिया को 

' बाल्टी , सामने कुएं में लगी लोहे की घिर्री

 , छत्ते की काडी - डंडी और घमेला

  , हँसिया , घाकू और 

  मिलाई बलाडिला 

  जगह जगह लोहे के टीले ।  




प्रसंग ::- पूर्ववत । पिता कल्पना कर रहा है कि जब उसकी नन्हीं चिटिया यह बताएगी कि उसके जात - पास लोहा कहाँ कहाँ उपस्थित है , तो वह उसे समझाएगा कि लोहा अन्यत्र भी उपस्थित है । इसी विषय पर यह उसे कुछ और बातें बताएगा । 



व्याख्या ::- पिता सोच रहा है कि लोहे की व्यापकता के बारे में नहीं बिटिया का ज्ञान बढ़ाने के उद्देश्य से में उसे याद दिलाऊँगा तथा उसे सिखाऊँगा कि तुम्हारे द्वारा बताई गई चीजों के अलावा फावड़ा , कुदाल , गिया , बसुला , खुरपी आदि में भी लोहा है । वह अपने पास खड़ी बैलगाड़ी की तरफ संकेत करके अपनी बेटी से कहेगा कि बैलगाड़ी के पहिए के ऊपर चढ़ा पट्टा तथा बैलों के गले में बंधी काँसे की घटियों के अंदर लगी गोलियों भी लोहे की है ।

                       उसकी पत्नी नन्हीं बिटिया को समझाती हुई कहेगी कि पानी लाने की बाल्टी , सामने कुएँ पर लगी घिरनी , छाते की काड़ी - डंडी और घमेला घर में काम आने वाला हसिया , चाकू आदि सब चीजों में लोहा है । इसके अलावा भिलाई तथा बलाडिला में हम जगह - जगह लोहे के टीले देख सकते हैं ।





         ( 4 )


 इसी तरह 

 पर भर मिलकर 

 धीरे धीरे सोच सोचकर 

 एक साय टूटेंगे कहाँ - कहाँ लोहा है 

 इस घटना से 

 " उस पटना तक 

 कि हर वो जो मेहनतकश 

 लोहा है 

 आदमी हर वो औरत 

 दबी सतायी 

 बोझ उठाने वाली , लोहा ! 

 जल्दी जल्दी मेरे कंधे से 

 ऊचा हा लड़की का हो दूलप प्यारा 

 कि हर वो आदमी 

 जो मेहनतकश 

 लोहा है 

  हर वो औरत 

  दवी सतायी 

  बोद उठाने वाली , लोहा । 

  



प्रसंग ::-- पूर्ववत् । पिता सोचता है कि परिवार के सभी लोग मिलकर नन्हीं विटिया को अपने आसपास की वस्तुओं के माध्यम से लोहे की पहचान करवाएंगे ये कुछ घटनाओं के माध्यम से भी उसकी पहचान कराते हैं । 


व्याख्या ::-- पिता कहता कि वे सभी मिलकर धीरे - धीरे लोहे की सर्वव्यापकता के विषय में सोचेंगे तथा लोहे की खोज करेंगे । उन्हें लगता है कि लोहा जीवन में हर जगह उपस्थित है । वे महसूस करते हैं कि परिश्रम करके अपने जीविका चलाने वाला श्रमिक भी सर्दी , गर्मी , वर्षा आदि में काम करता है 

         तथा लोहे की तरह ठोस एवं मजबूत बन जाता है । इस तरह उसमें भी लोहा है । कवि का विचार है कि अत्याचार से पीड़ित प्रत्येक औरत जो दुखों का बोझ उठा रही है , वह लोहा है । 

पिता सोचता है कि जल्दी से उसका बेटा बड़ा हो जाए तथा उसकी लड़की को अच्छा - सा बर मिल जाए , जिससे वह उसकी शादी करके अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सके । वह सोचता है कि इस प्रकार मेहनत के साथ जीवन बिताते हुए अपनी उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने वाला आदमी और हर प्रकार के अत्याचारों तथा दुखों का बोझ उठाने वाली औरत लोहा है । 

कहने का तात्पर्य यह है कि लोहा हमारी जिंदगी तथा संबंधों में हर जगह मौजूद है । 



Board Class 12th Hindi Book Solutions पद्य :--

1. कड़बक

2. पद सूरदास

3. पद तुलसीदास

4.छप्पय 

5.कविप्त 

6. तुमुल कोलाहल कलह में 

7. पुत्र वियोग 

8.उषा

10.अधिनायक 

11.प्यारे नन्हें बेटे

12. हार जित

13. गांव का घर






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